कांग्रेस की धुर विरोधी भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैंने आत्मसम्मान के लिए पार्टी छोड़ी। टिकट के सवाल पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भले ही उत्तर प्रदेश के मथुरा से उनका जुड़ाव रहा है और उनके माता-पिता का घर है, लेकिन उन्होंने कभी मथुरा से टिकट नहीं मांगा।
शिवसेना को लेकर उन्होंने कहा कि मेरा कभी मन परिवर्तन नहीं हुआ है। बचपन से ही मेरे मन में शिवसेना को लेकर सम्मान रहा है। केवल मैं ही नहीं, बल्कि हर मुंबईकर के दिल में शिवसेना राज करती है। मैंने 10 साल में पार्टी (कांग्रेस) से कुछ नहीं मांगा था। सेवा भाव से जुड़ी थी। पार्टी ने जो भी जिम्मेदारी दी, मैंने निभाई। कहा कि मैं मुद्दों की लड़ाई लड़ती रही हूं। महिला सम्मान भी मेरे लिए अहम मुद्दा रहा है।
राहुल को भेजा इस्तीफा
उन्होंने अपना इस्तीफा राहुल गांधी को भेजा। प्रियंका ने अपना इस्तीफा ट्विटर पर भी पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा, "बीते तीन दिन में देश भर से मिले प्यार और समर्थन से मैं काफी खुश और शुक्रगुजार हूं। समर्थन के इस सैलाब से मैं खुद को धन्य मानती हूं। इस सफर का हिस्सा बनने के लिए आप सबका शुक्रिया।"
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