गृहमंत्री का दायित्व मिलने के साथ ही अमित शाह सरकार में बेहद ताकतवर मंत्री बनकर उभरे हैं। अमूमन गृह मंत्रालय सरकार में नंबर दो की हैसियत वाले मंत्री को दिया जाता रहा है। अटल जी की सरकार में लालकृष्ण आडवाणी गृहमंत्री रहे। मुरली मनोहर जोशी को भी 13 दिन की सरकार में यह जिम्मा दिया गया था। हालांकि नंबर दो कौन, इसका जवाब अगर वरिष्ठता क्रम के लिहाज से मिलना है तो अभी भी राजनाथ सिंह मंत्रियों की वरिष्ठता सूची में नंबर दो पर हैं।
कई अपवाद रहे भी रहे हैं जब नंबर दो मंत्री को अलग-अलग दायित्व दिए गए। यह सरकार की प्राथमिकता के आधार पर तय होता रहा है। यूपीए सरकार में नंबर दो रहे प्रणब मुखर्जी के पास वित्त, विदेश और रक्षा मंत्रालयों का दायित्व रहा। वे हमेशा व्यावहारिक रूप से नंबर दो मंत्री और यूपीए सरकार के संकटमोचन बने रहे।
मोदी-शाह की केमिस्ट्री शानदार रही है। इस जोड़ी को सही मायने में भाजपा का विस्तार पूरे देश में करने का अहम किरदार माना जाता है। शाह के गृहमंत्रालय में आने के बाद धारा 370, 35 ए जैसे वैचारिक रूप से भाजपा व संघ के अहम मुद्दों पर सरकार के ज्यादा कठोर रुख की उम्मीद की जा रही है।
कार्मिक, जनशिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दे तथा वैसे सभी विभाग को जो किसी को भी आवंटित नहीं किए गए हैं वे प्रधानमंत्री के पास रहेंगे।
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