विशेषज्ञों का भी मानना था कि केंद्रीय बैंक सस्ते कर्ज के जरिए बाजार में तरलता बढ़ाकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज करने की कोशिश करेगा। वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर पांच साल के निचले स्तर पर आ गई है जिसके मद्देनजर रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बढ़ी है।
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