भारत में जन्मे और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी को 2019 के अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए चुना गया है। उनके साथ एमआईटी में ही प्रोफेसर उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो (47) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल क्रेमर (54) को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है।
दुनिया से गरीबी मिटाने के प्रयासों के लिए नोबेल पाने वाले अभिजीत ने कहा- मैं, पत्नी एस्थर डुफ्लो और अन्य साथी पिछले 20 साल से इस विषय पर काम कर रहे हैं। हमने गरीबी खत्म करने के समाधान देने की कोशिश की। कोलकाता में बिताए दिनों में इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद मिली।
अभिजीत बनर्जी (58) ने अर्थशास्त्र में नोबेल की घोषणा होने के बाद उन्होंने कहा की 'मैंने कभी नहीं सोचा था कि करियर में इतनी जल्दी नोबेल मिल जाएगा। मेरे नाम का ऐलान हुआ तो चौंक गया था। मैं 10 साल बाद ये अवॉर्ड मिलने की उम्मीद कर रहा था।'
अभिजीत से पूछा गया कि इस कामयाबी की जानकारी मिलने के बाद पहली प्रतिक्रिया क्या थी, तो उन्होंने बताया कि ' मैं 40 मिनट के लिए सो गया था, क्योंकि मुझे पता था कि जागने के बाद बहुत सारे कॉल अटेंड करने हैं। अभिजीत ने बताया कि वे अपनी मां से भी बात नहीं कर पाए।'
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