कोर्ट के इस फैसले पर 56 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई थी। कुल 65 याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इन पर 6 फरवरी को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
आपको बता दें कि ये फैसला सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर हुआ। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान बेंच इस मामले में फैसला सुनाया है। गुरुवार को फैसला सुनाने वाली बेंच में जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा भी शामिल हैं।
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मामला -
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी हटा दी थी। साथ ही कहा था कि महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी असंवैधानिक है। इस फैसले का भगवान अयप्पा के अनुयायी भारी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर के भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं और 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश से मंदिर की प्रकृति बदल जाएगी। इसी को लेकर कुछ महीनों तक तो भारी घमासान मचा था।
Digital Desk: Administrator
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।