प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अगुवाई वाली पीठ ने भाजपा नेता एवं अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में किसी समुदाय की राज्यवार आबादी के आधार पर अल्पसंख्यक का दर्जा देने के संबंध में दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने कहा कि धर्म को पूरे देश के परिदृश्य में जोड़ कर देखा जाना चाहिए। सीजेआई ने कहा, धर्म राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानता है। मुस्लिम हिंदू कानून का पालन करते हैं, लक्षद्वीप जैसी जगहों पर भी। इस पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी शामिल थे।
यह याचिका भाजपा नेता अश्वनी उपाध्याय ने दी थी। इसमें कहा गया था उत्तर-पूर्व में हिंदू दो से आठ फीसदी तक हैं, लेकिन वहां के 80 से 90 फीसदी इसाई देश में अल्पसंख्यक बनकर लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इससे पहले दो फैसलों में कह चुका है कि धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक का निर्धारण राज्य आधारित होना चाहिए। उसका निर्धारण देश की जनसंख्या के आधार पर नहीं होना चाहिए।
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