डोनाल्ड ट्रम्प देश के इतिहास में तीसरे ऐसे राष्ट्रपति बन गए हैं, जिन पर संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में महाभियोग की कार्रवाई की गई। ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग के लिए सदन में दो प्रस्ताव पेश किए गए थे। पहले प्रस्ताव में ट्रम्प पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप था। दूसरे प्रस्ताव में उनके खिलाफ महाभियोग सुनवाई के दौरान संसद के काम में अड़चन डालने का आरोप लगाया गया। दोनों ही प्रस्तावों पर वोटिंग के दौरान डेमोक्रेट्स ने ट्रम्प के खिलाफ और रिपब्लिकन ने ट्रम्प के पक्ष में वोटिंग की। दोनों प्रस्ताव के पक्ष में 230 और विपक्ष में 197 वोट पड़े। इस पर ट्रम्प ने कहा कि 'रिपब्लिकन वोट टस से मस नहीं हुए'। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में महाभियोग को लेकर डेमोक्रेट्स ने कहा कि ट्रंप के रिकॉर्ड पर ये महाभियोग की प्रक्रिया एक कभी न मिटने वाला धब्बा है। वहीं, वोटिंग से पहले एक डेमोक्रेट सांसद ने कहा, 'यहां आइडिया ऑफ अमरीका ही खतरे में है।' हालांकि, इस प्रक्रिया के अगले चरण में उच्च सदन में वोटिंग होनी है और वहां उनकी पार्टी रिपब्लिकन बहुमत में है। ऐसे में पूरी संभावना है कि सीनेट में महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो सकती है। अगर ट्रंप के खिलाफ प्रस्ताव होना है तो कम से कम 20 रिपब्लिकन को अपने ही पार्टी के खिलाफ वोटिंग करनी होगी।
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