शाह ने कहा- जनगणना और एनपीआर दोनों साथ चलने वाली प्रक्रियाएं हैं। यह 10 साल में होती हैं। 2011 में हुई थीं तो 2021 में होना जरूरी है। एनपीआर हमारे घोषणा पत्र का एजेंडा नहीं है। यह यूपीए सरकार का कानून है और यह अच्छी प्रक्रिया है। इसके लिए लाखों लोगों को ट्रेनिंग दी जानी है। हर राज्य में दफ्तर बनाए जाने हैं। हम अभी नहीं करेंगे तो यह समय से पूरा नहीं होगा। डेढ़ साल की प्रक्रिया है। अभी भी हम थोड़ा लेट हो गए हैं।
गृहमंत्री ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी के बीच मूलभूत अंतर है। एनपीआर जनसंख्या का रजिस्टर है। इसके आधार पर अलग-अलग सरकारी योजनाएं बनती हैं। लेकिन, एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता पंजी) में हर व्यक्ति से दस्तावेज मांगा जाता है कि आप किस आधार पर भारतके नागरिक हैं। एनपीआर में कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। अगर कोई जानकारी मौजूद नहीं है तो कोई बात नहीं। हां, इसमें आधार कार्ड की जानकारी देने का प्रावधान है। किसी के पास आधार है तो नंबर देने में हर्ज क्या है। एनपीआर का कोई डेटा एनआरसी के प्रयोग में आ ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि अगर किसी का नाम एनपीआर से गायब है, तो भी उसकी नागरिकता को खतरा नहीं होगा।
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