NRC और CAA पर देश के मौजूदा हालात पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दी जानकारी
(India) देशभर में नागरिकता संशोधन कानून (CAA), नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC), नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) को लेकर फैले विरोध को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार शाम को न्यूज एजेंसी एएनआई को इंटरव्यू देकर इससे जुड़ी गलतफहमियां दूर कीं। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के अपडेशन के बारे में फैली आशंकाओं को समाप्त करते हुए कहा कि इसका नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस से कोई संबंध नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने CAA पर संवाद में खामी की बात भी स्वीकारी।

शाह ने कहा- जनगणना और एनपीआर दोनों साथ चलने वाली प्रक्रियाएं हैं। यह 10 साल में होती हैं। 2011 में हुई थीं तो 2021 में होना जरूरी है। एनपीआर हमारे घोषणा पत्र का एजेंडा नहीं है। यह यूपीए सरकार का कानून है और यह अच्छी प्रक्रिया है। इसके लिए लाखों लोगों को ट्रेनिंग दी जानी है। हर राज्य में दफ्तर बनाए जाने हैं। हम अभी नहीं करेंगे तो यह समय से पूरा नहीं होगा। डेढ़ साल की प्रक्रिया है। अभी भी हम थोड़ा लेट हो गए हैं।

गृहमंत्री ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी के बीच मूलभूत अंतर है। एनपीआर जनसंख्या का रजिस्टर है। इसके आधार पर अलग-अलग सरकारी योजनाएं बनती हैं। लेकिन, एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता पंजी) में हर व्यक्ति से दस्तावेज मांगा जाता है कि आप किस आधार पर भारतके नागरिक हैं। एनपीआर में कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। अगर कोई जानकारी मौजूद नहीं है तो कोई बात नहीं। हां, इसमें आधार कार्ड की जानकारी देने का प्रावधान है। किसी के पास आधार है तो नंबर देने में हर्ज क्या है। एनपीआर का कोई डेटा एनआरसी के प्रयोग में आ ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि अगर किसी का नाम एनपीआर से गायब है, तो भी उसकी नागरिकता को खतरा नहीं होगा।

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