बुधवार को भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी हिंसा वाले इलाके का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। भारी संख्या में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल की तैनाती के कारण बुधवार को उपद्रवी गायब नजर आए। हिंसा से मरने वालों की संख्या बुधवार को 28 पहुंच गई, जबकि करीब 250 घायलों को उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां 30 से अधिक की हालत नाजुक बताई जा रही है।
उत्तर पूर्वी दिल्ली में पिछले तीन दिन के अंदर हिंसा के दौरान करीब 800 से अधिक मकानों, दुकानों, स्कूल, फैक्टरियां और वाहनों को आग के हवाले किया गया है। मंगलवार रात को सबसे ज्यादा हिंसा शिव विहार, चमन पार्क और बृजपुरी रोड पर हुई। पथराव और फायरिंग कर सैकड़ों मकानों, दुकानों और वाहनों में आग लगाई गई।
चांदबाग पुलिया के पास नाले से एक शव निकाला गया, जिसकी पहचान आईबी के कांस्टेबल अंकित शर्मा के रूप में हुई। वह खजूरी में परिवार के साथ रहते थे। परिजनों का आरोप है कि मंगलवार शाम को वह ड्यूटी से घर लौट रहे थे। तभी चांदबाग पुलिया पर कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को नाले में फेंक दिया गया। अंकित के पिता रविंदर शर्मा आईबी में हेड कांस्टेबल हैं। उन्होंने एक नेता के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अंकित की पिटाई के साथ गोली भी मारी गई है।
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