निर्भया गैंगरेप कांड में आखिरकार सात साल बाद चारों दोषियों को फांसी दे दी गई। ठीक साढे 5 बजे तिहाड़ जेल के फांसी घर में चारों दोषियों को फांसी के फंसे पर लटकाया गया। तिहाड़ जेल के डॉयरेक्टर संदीप गोयल ने चारों दोषियों की फांसी के फंदे पर लटकाने की पुष्टि की। दोषी अक्षय कुमार, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और विनय शर्मा को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। देर रात सुप्रीम कोर्ट से दोषियों की याचिका खारिज होने के बाद चारों गुनहगारों को जल्लाद पवन ने सूली पर लटकाया। फांसी देने के बाद तिहाड़ जेल के बाहर जश्न का माहौल दिखा । लोग हाथों में तिरंगा झंडा लहराते हुए इंसाफ मिलने के नारे लगाते रहे। लोगों ने निर्भया जिंदाबाद, हर बेटी को न्याय मिले और भारत माता के नारे लगाए।
7 साल, 3 महीने और 4 दिन के बाद वह सुबह आ ही गई, जब निर्भया सच में मुस्कुराई। शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे उसके सभी दोषियों को एक साथ तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया। 16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली में छह दरिंदों ने निर्भया से दुष्कर्म किया था। एक ने जेल में खुदकुशी कर ली थी, दूसरा नाबालिग था इसलिए तीन साल बाद छूट गया। बाकी बचे चार- मुकेश (32 साल), अक्षय (31 साल), विनय (26 साल) और पवन (25 साल) अपनी मौत से 2 घंटे पहले तक कानून के सामने गिड़गिड़ाते रहे। अंत में जीत निर्भया की ही हुई। सभी दुष्कर्मियों को निचली अदालत ने 9 महीने में ही फांसी की सजा सुना दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट को महज 6 महीने लगे फांसी की सुनाई जा चुकी सजा पर मुहर लगाने में। इसके 2 साल 2 महीने बाद मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया कि फांसी ही होगी। फिर 2 साल 10 महीने और गुजर गए। 4 बार डेथ वारंट जारी हुए। आखिरी बार शुक्रवार को फांसी का दिन मुकर्रर कर दिया गया।
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