लॉक डाउन नहीं होता तो देश में 23 हजार की जगह 73000 मामले होते- नीति आयोग
(India) कोरोना को लेकर नीति आयोग ने कहा है कि हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि लॉकडाउन कोरोना वायरस की दोहरी दर को धीमा करने और जान बचाने में प्रभावी रहा है। लॉकडाउन का निर्णय समय पर लिया गया था ऐसा नहीं हुआ होता तो आज देश में 23 हजार मामलों की जगह 73 हजार केस होते। कोरोना संक्रमण को लेकर शुक्रवार को राहत की खबर आई। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि बीते 14 दिन में 80 जिलों में कोई नया केस सामने नहीं आया। वहीं, 15 ऐसे जिले भी हैं जहां पिछले 28 दिनों से संक्रमण का कोई नया मामला नहीं सामने आया है। लॉकडाउन के चलते संक्रमितों की संक्रमण के फैलने की रफ्तार भी कम हुई है। अब हर दस दिन में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो रही है।ठीक होने की दर यानी रिकवरी रेट 20.57% हुआ है।

नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल के मुताबिक, लॉकडाउन के पहले हफ्ते में देश में1251 मामले आए और इसका डबलिंग रेट 5.2 रहा। जबकि दूसरे हफ्ते के अंत में 4.2 के डबलिंग रेट के साथ 4421 मामले आए।तीसरे हफ्ते में 10,363 मामले आए और डबलिंग रेट 8.6 रहा। लॉकडाउन के बाद से हमारा डबलिंग रेट बदल गया। अगर लॉकडाउन जैसे उपायों को लागू करके संक्रमण का रेट नहीं रोकते तो आज हमारे देश में काफी नुकसान होता। आज हमारे यहां 23 हजार मामले हैं, अगर लॉकडाउन लागू नहीं होता तो 73 हजार केस होते।

असम के मंत्री हेमंत बिश्वशर्मा ने कहा कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज आज सामान्य रोगियों के लिए खुल गए हैं। मरीजों के लिए जिला अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी भी खोले गए हैं। केवल महेंद्र मोहन चौधरी अस्पताल अन्य रोगियों के लिए बंद रहेगा क्योंकि यह #COVID19 के लिए समर्पित है।

Digital Desk: Administrator

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