रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट पर लगी रोक, लॉकडाउन का एक महीना पूरा
(India) कोरोना वायरस के बढ़ते मामले की बीच तेजी से संक्रमितों की जांच के लिए एंटीबॉड़ी किट का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने के बाद अब रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट के इस्तेमाल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। बता दें कि चीन से आयात किए गए रैपिड टेस्ट किट को लेकर देश में घमासान मचा हुआ है। राजस्थान और पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से एक्यूरेसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। अब इस मामले पर मेडिकल की नियामक संस्था भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ( ICMR ) ने राज्यों को इसका उपयोग न करने की सलाह दी है और अगले आदेश तक इस टेस्टिंग किट के इस्तेमाल पर रोक दी है।
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए ठीक एक महीने पहले यानी 25 मार्च से देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन शुरू हुआ था। तब तक देश में कोरोना के 603 पॉजिटिव मिल चुके थे। इनमें से 11 की मौत हुई थी और 43 मरीज ठीक हो चुके थे। तब देश में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए सिर्फ 70 कोविड डेडिकेटेड अस्पताल थे। पीपीई किट, एन-95 मास्क, वेंटिलेटर की संख्या जरूरत के हिसाब से काफी कम थी। इस एक महीने में इन सब में बढ़ोतरी देखने को मिली है। कोविड-19 अस्पतालों की संख्या 70 से बढ़कर 900 हो गई है। अब हर रोज 25 हजार पीपीई किट तैयार हो रहे हैं। वेंटिलेटर्स की संख्या 14 हजार से बढ़कर 50 हजार के करीब पहुंच चुकी है। हालांकि, जरूरत के हिसाब से यह अभी बहुत कम है।
स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि लॉकडाउन शुरू होने पर संक्रमितों की संख्या बढ़ने की रफ्तार में कम हुई है। 24 से 30 मार्च के बीच 1251 लोग पॉजिटिव पाए गए थे। संक्रमितों के डबल होने की दर 5.2 थी। मतलब हर पांच दिन में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो रही थी। लॉकडाउन के दूसरे हफ्ते यानी 31 मार्च से 6 अप्रैल के बीच इसमें और तेजी देखी गई। 4.2 के डबलिंग रेट के साथ 4421 केस सामने आए।
तीसरे हफ्ते (7-13 अप्रैल) से डबलिंग रेट में गिरावट दर्ज की गई। उस बीच 10,363 मामले आए और डबलिंग रेट 6.0 रहा। चौथे हफ्ते डबलिंग रेट बढ़कर 6 से बढ़कर 8.6 दिन हो गया। अब पांचवें हफ्ते हर 10 दिन में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो रही है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने पिछले दिनों यह दावा किया था कि अगर उस दौरान लॉकडाउन और बाकी जरूरी कदम नहीं उठाए गए होते तो 15 अप्रैल तक देश में संक्रमितों की संख्या 8 लाख हो गई होती। वहीं, शुक्रवार को नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि लॉकडाउन का फैसला वक्त पर ना लिया गया होता तो आज 23 हजार की जगह 73 हजार संक्रमित हो सकते थे।

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