भारत खाड़ी देशों समेत दुनिया के 12 देशों में फंसे अपने नागरिकों को लाएगा। 7 मई से शुरू होने वाले इस अभियान में 12 देशों में 64 विमान भेजे जाएंगे। इन लोगों में भारतीय छात्रों समेत 14 हजार 800 लोग शामिल होंगे। हर दिन करीब 2000 लोगों को लाने की योजना है। इन्हें भारत आने से पहले कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। वापसी से पहले कोरोना टेस्ट कराना भी जरूरी होगा। गृह मंत्रालय के मुताबिक, केवल उन लोगों को यात्रा की इजाजत मिलेगी, जिनमें संक्रमण का कोई लक्षण नहीं होगा। भारत आने के बाद भी जरूरी जांच होगी और उन्हें 14 दिन तक क्वारैंटाइन किया जाएगा। लोगों को लाने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकाल बनाया गया है।
इस अभियान के पहले दौर में 14 हजार 800 भारतीयों की वापसी होगी। दुनियाभर के भारतीय दूतावास और उच्चायोग वहां फंसे भारतीयों की सूची तैयार कर रहे हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो विदेशों में फंसे 2 लाख भारतीय घर वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। 13 मई से शुरू होने वाले दूसरे दौर में इन भारतीयों को मिल सकता है। यह भारतीयों की घर वापसी का 30 साल का सबसे बड़ा अभियान होगा। इससे पहले 1990 में गल्फ वॉर के समय कुवैत से 1.70 लाख भारतीय एयरलिफ्ट किए गए थे।
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