LAC के पास के इलाके में इजराइल के Heron ड्रोन से निगरानी कर रही भारतीय सेना
यूएस या इजराइल से आर्म्ड ड्रोन भी लेने की तैयारी, एलएसी पर पूरी तैयारी के साथ खड़े हैं जवान
वास्तविक नियंत्रण रेखा के इलाकों में ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में लड़ने के लिए ट्रेंड जवानों की तैनाती
लेह/श्रीनगर
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बनी तनावपूर्ण स्थितियों के बीच चीन की हरकतों की निगरानी के लिए सेना और एयरफोर्स पूरी चौकसी बरत रहे हैं। गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए संघर्ष के बाद इस इलाके में निगरानी के लिए अब उन मानवरहित ड्रोन्स भेजा गया है। इसके अलावा उच्च पर्वतीय क्षेत्र में लड़ने की ट्रेनिंग लेने वाली घातक टीमों को भी सेना के साथ फॉरवर्ड लोकेशंस पर भेजा जा चुका है। ITBP (Indian Army in Ladakh) को सेना के साथ लेह के इलाकों में भेजने का फैसला डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस ले. जनरल परमजीत सिंह और आईटीबीपी के डीजी एसएस देसवाल के लेह दौरे के बाद हुआ है।
दोनों उच्च अधिकारियों के साथ सेना की 14वीं कोर के कमांडर ले. जनरल हरिंदर सिंह भी लेह पहुंचे थे, जहां उन्होंने वरिष्ठ अफसरों को यहां की सामरिक तैयारियों पर फीडबैक दिया।
करगिल में मिले अनुभव बनेंगे मददगार
आईटीबीपी के अलावा उन जवानों को भी एलएसी के पास के इलाकों में भेजा जा रहा है, जिन्हें उच्च पर्वतीय इलाकों का अनुभव हो। इसके अलावा करगिल के वक्त में लेह और द्रास के इलाकों में हुए सामरिक अनुभव भी फौज के लिए बड़ी मदद का जरिया बन सकते हैं।
ऊंचे इलाकों में रहने वालों को मिलेगा फायदा
भारतीय सेना के पूर्व अध्यक्ष रहे एक अधिकारी ने कहा कि पहाड़ी इलाकों में लड़ाई के हालात आम जंग से बिल्कुल अलग होते हैं। इस लड़ाई में ऊंचे इलाके में रहे जवानों को एडवाटेंड मिल सकता है। भारत के तमाम इलाके ऐसे हैं, जहां लंबे वक्त से सेना उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में रह चुकी है। ऐसे में भारतीय सेना को चीन की सेना से अनुभव के आधार पर ज्यादा फायदा मिल सकता है।
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