दरअसल कोरोना वायरस संकट के चलते मार्च में ही सीबीएसई और आईसीएसई समेत कई स्टेट बोर्ड के भी कुछ पेपर बाकी रह गए थे। हालांकि कुछ स्टेट बोर्ड ने परीक्षा लिए बिना ही छात्रों को पास कर अगली क्लास में भेज दिया था। लेकिन सीबीएसई ने बचे हुए पेपर के लिए 1 से 15 जुलाई का शेड्यूल जारी किया था।
लेकिन बाद में सीबीएसई के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई। इसके बाद गई और एग्जाम रद्द कराने की मांग की गई।
सीबीएसई ने कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से 10वीं और 12वीं के बचे हुए पेपर रद्द करने का फैसला किया है। इन दोनों क्लास के 29 सब्जेक्ट्स के पेपर 1 से 15 जुलाई के बीच होने थे। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई में बोर्ड की तरफ से सरकार ने बताया कि अब 12वीं के स्टूडेंट्स का असेसमेंट उनके पिछले 3 एग्जाम के आधार पर होगा। वे बचे हुए पेपर बाद में भी दे सकेंगे।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आईसीएसई बोर्ड ने भी 10वीं और 12वीं बोर्ड के एग्जाम रद्द करने का फैसला किया है, लेकिन वह स्टूडेंट्स को बाद में पेपर देने का विकल्प नहीं देना चाहता।
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