(India)
आम जनता के लिए उतारने से पहले किसी भी वैक्सीन का कई चरणों में ट्रायल होता है। यह ट्रायल वैक्सीन के असर और उसकी सुरक्षा को जांचने के लिए होता है। सबसे पहले वैक्सीन प्री-क्लिनिकल एनालिसिस से गुजरती है। इसमें वैक्सीन के अलग-अलग पहलुओं को देखा जाता है। यहां से क्लियर होने के बाद वैक्सीन को जानवरों पर टेस्ट किया जाता है। इसकी रिपोर्ट ठीक आने पर वैक्सीन को इंसानों पर ट्रायल की परमिशन मिल जाती है। इसके तीन चरण होते हैं। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी और फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने मिलकर कोरोना की वैक्सीन बनाई है। ChAdOx1-S टाइप वैक्सीन कैंडिडेट फिलहाल कई देशों में फेज 3 ट्रायल्स से गुजर रही है। इस वैक्सीन को पाने की कोशिश में दुनिया के कई देश लगे हुए हैं। एस्ट्राजेनेका से कई सरकारों ने करोड़ों डोज का सौदा किया है। भारत में यह वैक्सीन सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के जरिए उपलब्ध होगी जिसने एस्ट्राजेनेका से 100 करोड़ डोज का करार किया है।
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