(India)
कई लोग इस बात को लेकर सांसत में हैं कि आखिर दो-चार दिनों के अंदर ही कोरोना रिपोर्ट निगेटिव से पॉजिटिव कैसे हो सकती है? वो कभी लैब को दोषी मानते हैं तो कभी सैंपल लेने वाले को तो कभी टेस्ट सेंटर को। हालांकि, मामला कुछ अलग है। कोरोना की नई लहर पहली से कुछ अलग है। बीते 15 महीनों में कोरोना ने कई रूप बदल लिए हैं, इस कारण टेस्ट किट भी धोखा खा जा रहा है। हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया ने मंगलवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि प्रत्येक पांच में से एक यानी 20% मरीजों की झूठी निगेटिव रिपोर्ट आ रही है। कुछ मरीजों की तो दूसरी और तीसरी जांच में भी संक्रमण का पता नहीं चल पा रहा है। अमेरिका के इलियोनिस यूनिवर्सिटी और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पिछले साल सितंबर महीने में ही एक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया था जिसमें कोरोना के बदलते रूप के कारण उसके टेस्ट की पकड़ से बचने पर चिंता जताई गई थी।
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