Coal Crisis: देश में क्यों आया कोयले का संकट? 5 ही दिनों का स्टॉक
(India) कोयले की कमी को दूर करने के लिए सरकार में बैठकों का दौर चल रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिजली मंत्री आरके सिंह और कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ बैठक की. इस बीच सरकार ने राज्यों और बिजली कंपनियों को भरोसा दिलाया है कि वह कोयले की मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार, पर देखना रहेगा यह कहा तक बात पूरी हो पति है

पर्याप्त खनन नहीं करने की वजह कोविड और बारिश को बताया. लंबे समय तक मानसून ने खनन को प्रभावित किया और आयातित कोयले की कीमतों ने भी मौजूदा स्थिति में योगदान दिया.

विदेशी कोयले के आयात में 12 फीसदी की गिरावट आई है. ज्यादा कीमतों के कारण, बिजली कंपनियां भी घरेलू कोयले पर निर्भर हो गई हैं. राज्यों पर कोल इंडिया का बहुत बड़ा बकाया भी है. सूत्रों से पता चला है कि महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु बड़े डिफॉल्टर हैं. राज्यों को कोल इंडिया को 20,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है.सरकार के सूत्रों ने कहा कि बड़ी मात्रा में बकाया होने के बावजूद, आपूर्ति जारी है और हम बिजली और कोयले की आपूर्ति जारी रखेंगे. गांवों के विद्युतीकरण और औद्योगीकरण ने भी कोयले की मांग को बढ़ा दिया है.

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