33 सीटों पर जीत हासिल करने के बाद विधान परिषद में भाजपा के पास अब 100 में से 68 सीटें हो गई हैं। वहीं, सपा के पास 17 सीटें हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पास चार और कांग्रेस के एक एमएलसी हैं। अपना दल के पास एक सदस्य है तो 2 शिक्षक एमएलसी हैं। निर्दलीय समूह का एक, एक निर्दलीय और निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) का एक सदस्य है।
जुलाई तक सपा के 12 सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। तब सपा के 5 सदस्य होंगे। जुलाई में होने वाले विधान परिषद चुनाव में एक सदस्य के लिए 11 विधायकों की जरूरत होगी। विधानसभा में मौजूदा स्थिति के मुताबिक, सपा चार सीटों को जीतने की स्थिति में होगी। ऐसे में सपा के सदस्यों की कुल संख्या घटकर 10 से नीचे आ सकती है। यदि ऐसा होता है तो सपा को नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ना होगा। नियम के मुताबिक, इस पद के लिए विपक्षी दल के पास न्यूनतम 10 फीसदी यानी 10 सीटों की आवश्यकता है।
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