1.52 लाख करोड़ रुपए का पेंशन बिल बचाने के लिए अग्निपथ स्कीम को लाया गया, इससे हमारी डिफेंस की ताकत कम होगी
(India) जिन जंगल, पहाड़ों और हाई एल्टीट्यूट में अभी हमारे जवान दुश्मनों को धूल चटाते हैं, वहां 4 साल के लिए रिक्रूट होने वाले ये जवान कैसे काम कर पाएंगे।

नए लड़कों के टेक्नोफ्रेंडली होने की बात कही जा रही है, लेकिन इन जगहों पर टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि जज्बात और स्पेशलाइजेशन की जरूरत होती है, जो पूरे डेडिकेशन और प्रॉपर ट्रेनिंग से ही आता है। वास्तव में 5 से 6 साल की ड्यूटी के बाद जवान यूनिट का हिस्सा बन पाते हैं। उन्हें मालूम होता है कि अब सेना ही उनका घर है इसलिए उनका जज्बा और डेडिकेशन बहुत हाई लेवल का होता है। लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया (रिटायर्ड) कहते हैं, मेरे हिसाब से 1.52 लाख करोड़ रुपए का पेंशन बिल बचाने के लिए अग्निपथ स्कीम को लाया गया है। इससे हमारी डिफेंस की ताकत कम होगी।

इजरायल और US में ऐसा ही होने की बात कही जा रही है, लेकिन इजरायल की पॉपुलेशन दिल्ली से भी कम है। वहां सर्वाइवल का सवाल है। हर किसी को सेना में जाना कम्पलसरी है। और US में तो हाल ऐसे हैं कि रिक्रूटमेंट अफसर घर-घर जाकर कहते हैं कि सेना में आइए, क्योंकि वहां के लोगों की लग्जरी की आदत है।
हमारे देश में ऐसे हालात नहीं है। हमारे यहां 4 साल पहले से लड़के सेना में जाने की तैयारी करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि एक बार सेना में चले गए तो पूरा परिवार सिक्योर हो जाएगा। अब 4 साल की नौकरी के लिए कोई 4 साल पहले से तैयारी क्यों करेगा।

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