हालांकि सियासी गलियारों में कांग्रेस की इस यात्रा को 2024 के लोकसभा चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस इसके जरिये अपने सोए हुए काडर को जगाते हुए पार्टी में एक नई जान फूंकना चाहती है.
कन्याकुमारी से शुरू होकर देश के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए 3500 किलोमीटर का सफर तय करने वाली इस यात्रा से कांग्रेस अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में किस हद तक कामयाब होगी, ये तो हम भी नहीं जानते. लेकिन मुख्य विपक्षी दल होने के नाते उसका पहला फर्ज यही बनता है कि वो आम जनता से जुड़ी तकलीफों को जानने-समझने के लिए पहले उनके बीच जाये और फिर सरकार पर सवालों की बौछार करे.
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