बाद यात्रा 3 जनवरी से दोबारा शुरू होगी और अगले चरण में उत्तर प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर पहुंचेगी। इस दौरान राहुल गांधी ने अपनी जिजी विषा, संघर्ष करने की
क्षमता और पब्लिक से खुद को कनेक्ट करनी की क्षमता का पुरजोर प्रदर्शन किया।
कथित नफरती माहौल के बीच प्यार के एक सूत्र में भारत को जोड़ने की कांग्रेस की इस कवायद के बीच कई ऐसे नारे लगे जो इसकी प्रासंगिकता को साबित करते रहे हैं।
मसलन 'महंगाई से नाता तोड़ो, मिलकर भारत जोड़ो', 'बेरोजगारी का जाल तोड़ो, मिलकर भारत जोड़ो' और "संविधान बचाओ, भारत जोड़ो।'
दरअसल, जो बीजेपी के खिलाफ गढ़े गए हैं और 2024 के आम चुनावों से पहले कांग्रेस के पक्ष में देशव्यापी माहौल बनाने की दिशा में सार्थक साबित हो सकते
हैं लेकिन यह डेढ़ साल के अंतराल की राजनीतिक सक्रियता और एक्शन के बदले विरोधी पक्ष के रिएक्शन पर निर्भर करेगा। वस्तुत:इस बात से भी इनकार नहीं किया जा
सकता है कि राहुल गांधी की इस यात्रा का कोई फायदा हुआ ही नहीं। कांग्रेस की यात्रा से जो सियासी फायदे हुए हो सकते हैं
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