विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित हाई बीपी केवल हृदय ही नहीं, बल्कि किडनी और लिवर की कार्यप्रणाली को भी नुकसान पहुंचाता है। किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं लंबे समय तक बढ़े बीपी का दबाव झेल नहीं पातीं, जिससे फिल्ट्रेशन प्रभावित हो जाता है और किडनी फेलियर का जोखिम बढ़ता है। इसी तरह, लिवर तक रक्त प्रवाह कम होने से उसकी कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और समय के साथ सूजन व फाइब्रोसिस जैसी समस्याएं बढ़ने का खतरा रहता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नियमित रूप से बीपी चेक कराना, नमक कम रखना, पर्याप्त पानी पीना, वजन कंट्रोल रखना और डॉक्टर की सलाह मानना इस खतरे से बचने के लिए बेहद जरूरी है।
Author: JAN TV Editorial Team
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