इस प्रोजेक्ट के तहत 1.4 गीगावाट विंड पावर और 200 मेगावाट सोलर ऊर्जा भी ग्रिड से जोड़ी जाएगी, जिससे डेटा सेंटर को स्वच्छ ऊर्जा मिल सके। हालांकि चीन और अन्य देशों में भी बड़े ऊर्जा भंडारण प्रोजेक्ट मौजूद हैं—जैसे संयुक्त अरब अमीरात में 19GWh का लिथियम-आयन सिस्टम और चीन का लगभग 40GWh क्षमता वाला पंप्ड-हाइड्रो प्लांट—फिर भी 30GWh का यह आंकड़ा बैटरी तकनीक के लिहाज से बेहद बड़ा माना जा रहा है।
आयरन-एयर बैटरी तकनीक “रिवर्सिबल रस्टिंग” प्रक्रिया पर आधारित है। डिस्चार्ज के दौरान आयरन पेलेट्स हवा के संपर्क में आकर जंग में बदलते हैं और ऊर्जा रिलीज करते हैं, जबकि चार्जिंग के समय जंग से ऑक्सीजन अलग कर आयरन को फिर मूल अवस्था में लाया जाता है। लंबे समय तक ऊर्जा स्टोर करने की यह तकनीक पवन और सौर जैसे नवीकरणीय स्रोतों से 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की चुनौती को हल करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
Author: JAN TV Editorial Team
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