इस तकनीक के तहत नमक का घोल हवा से नमी को सोख लेता है, जबकि एक पतली पॉलिमर मेम्ब्रेन यह सुनिश्चित करती है कि नमक के कण कमरे की हवा में न मिलें। आम एसी जहां ठंडक और डीह्यूमिडिफिकेशन के लिए ज्यादा बिजली लेते हैं, वहीं यह हाइब्रिड सिस्टम वेस्ट हीट का इस्तेमाल कर घोल को फिर से सक्रिय कर देता है। इससे अलग से अतिरिक्त बिजली खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती।
रिसर्च के अनुसार, सामान्य 1200 वॉट की खपत वाले एसी की तुलना में यह सिस्टम करीब 800 वॉट में समान कूलिंग दे सकता है। तटीय क्षेत्रों में लगभग 28% और शुष्क इलाकों में 41% तक ऊर्जा बचत संभव बताई गई है। 2019 की इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान रिपोर्ट में भविष्य में कूलिंग डिमांड बढ़ने की आशंका जताई गई थी, ऐसे में यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण और उपभोक्ताओं की जेब दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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