राम रहीम को अगस्त 2017 में साध्वियों से यौन शोषण के मामले में सजा हुई थी। 9 साल में यह 17वीं बार है, जब वह पैरोल या फरलो पर जेल से बाहर आया है। इस साल जनवरी में उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी। इसके बाद 26 मई को 30 दिन की पैरोल दी गई। 30 दिन की पैरोल पूरी करने के बाद वह 25 जून को सुनारिया जेल वापस लौटा था।
उधर, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने राम रहीम के बार-बार जेल से बाहर आने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राज्य स्तर पर राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो देकर राहत पहुंचाई जा रही है। उनका कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया कहीं न कहीं सवाल खड़े करती है।
राम रहीम को तीन मामलों में सजा सुनाई गई थी, जबकि दो मामलों में वह बाद में बरी हो चुका है। 25 अगस्त 2017 को पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने उसे दो साध्वियों से रेप का दोषी ठहराया था। 28 अगस्त 2017 को दोनों मामलों में कुल 20 साल की सजा सुनाई गई। इसी सजा के चलते वह अभी भी जेल में है।
डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्याकांड में भी राम रहीम को पहले उम्रकैद की सजा हुई थी। CBI की विशेष अदालत ने 2021 में उसे हत्या की साजिश का दोषी मानते हुए उम्रकैद सुनाई थी। हालांकि, मई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया।
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी राम रहीम को पहले उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। CBI की विशेष अदालत ने जनवरी 2019 में उसे हत्या का दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा दी थी। छत्रपति ने अपने अखबार पूरा सच में डेरा से जुड़ी एक साध्वी के यौन शोषण के आरोप वाला गुमनाम पत्र प्रकाशित किया था। इसके बाद अक्टूबर 2002 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
7 मार्च 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम की दोषसिद्धि रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील सुनने की मंजूरी दे दी।
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