नेपाल में तिब्बत से आई बाढ़ ने मचाई तबाही, 8 की मौत; 105 भारतीयों समेत 291 विदेशी लापता
(International) चीन के तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाकों में कई घरों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ की चपेट में रसुवा का एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी आ गया और वह बह गया। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, अब तक 8 लोगों की मौत की खबर है।

बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक, 291 विदेशी पर्यटकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात 9 पुलिसकर्मी भी लापता बताए जा रहे हैं।

रेस्क्यू टीमों ने अब तक 25 लोगों को बचा लिया है। राहत और बचाव अभियान में 14 हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं। लापता लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का काम जारी है।

नेपाल में बाढ़ का असर अब भारत तक पहुंचने की आशंका है। इसे देखते हुए बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में करीब 3 मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई है। ऐसे में नदी के आसपास के इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

रसुवा के टिमुरे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भेजा गया हेलिकॉप्टर बिना उतरे काठमांडू लौट आया। बाढ़ के पानी में स्थानीय हेलिपैड बह गया था, इसलिए पायलट को उतरने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिली। पायलट ने काठमांडू पोस्ट को बताया कि ऊपर से देखने पर टिमुरे गांव का बड़ा हिस्सा नजर ही नहीं आ रहा था। उन्होंने कहा कि त्रिशूली नदी का पानी अचानक बहुत तेजी से बढ़ा।

रसुवा में पिछले 24 घंटे में 7 मिमी से ज्यादा बारिश नहीं हुई, इसलिए बाढ़ की वजह स्थानीय बारिश नहीं मानी जा रही। अधिकारियों को शक है कि तिब्बत में ग्लेशियल झील फटने यानी GLOF से अचानक पानी भोटेकोशी नदी में आया। ICIMOD-UNDP की 2020 की स्टडी के मुताबिक, भोटेकोशी बेसिन में 122 ग्लेशियल झीलें हैं। कौन-सी झील फटी, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है और सैटेलाइट इमेज व तकनीकी जांच से स्रोत का पता लगाया जा रहा है।

टिमुरे में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान की आशंका है। फिलहाल मौतों और नुकसान का सही आंकड़ा जुटाया जा रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रसुवा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को तैनात करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित इलाकों में दूसरे जिलों से भी अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी भेजे गए हैं।

प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ भी भेजा जा रहा है। बालेन ने नदी किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित जगह पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। भोटेकोशी में पानी बढ़ने के बाद आगे त्रिशूली नदी में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और खतरा बढ़ने पर सुरक्षित जगह जाने की सलाह दी गई है। त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों से नदी में जाने, मछली पकड़ने और किनारे पर काम करने से बचने को कहा गया है।

भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में आती है और आगे जाकर सुनकोशी नदी में मिलती है। यही सुनकोशी नदी आगे चलकर सप्तकोशी यानी कोसी नदी बनती है, जो भारत के बिहार में प्रवेश करती है। पिछले साल भी भोटेकोशी में आई बाढ़ से नेपाल को बड़ा नुकसान हुआ था। उस हादसे में 9 लोगों की जान गई थी, जबकि 24 लोग लापता हो गए थे। नेपाल और चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज भी बाढ़ में बह गया था।

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