मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर USCIRF की आपत्ति, RSS सदस्यों पर प्रतिबंध की मांग
(India) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF ने चिंता जताई है। आयोग के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर सवाल उठाते हुए अमेरिकी सरकार से RSS से जुड़े लोगों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों पर विचार करने की अपील की है।

USCIRF के बयान में आरोप लगाया गया है कि RSS से जुड़े संगठनों के सदस्यों पर ईसाइयों, दलितों, मुसलमानों और सिखों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में शामिल होने के आरोप रहे हैं। आयोग ने भारत की मौजूदा सरकार पर RSS की हिंदुत्व विचारधारा से मेल खाने वाली नीतियां अपनाने का आरोप भी लगाया।


USCIRF अध्यक्ष आसिफ महमूद ने अमेरिकी प्रशासन से RSS के सदस्यों और धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों में शामिल भारतीय अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार करने को कहा है।

उन्होंने विशेष रूप से मोहन भागवत का मौजूदा अमेरिकी वीजा रद्द करने और उन्हें भविष्य में अमेरिका में प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित करने की संभावना पर विचार करने की मांग की।

हालांकि, USCIRF की सिफारिशें अमेरिकी सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होती हैं। यह आयोग धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों की निगरानी करता है और अमेरिकी सरकार को अपनी नीतिगत सिफारिशें देता है।

USCIRF का बयान ऐसे समय आया है जब मोहन भागवत अमेरिका के दौरे पर हैं। वह 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करने वाले हैं।

यह कार्यक्रम RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित किए जा रहे वैश्विक संपर्क अभियानों का हिस्सा बताया गया है। अमेरिका में होने वाले कार्यक्रम के जरिए भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संगठन के संपर्क और संवाद को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

USCIRF लंबे समय से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर अपनी रिपोर्टों और बयानों में चिंता जाहिर करता रहा है। आयोग का कहना है कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर स्थिति को लेकर निगरानी और नीतिगत ध्यान की जरूरत है।

वहीं, भारत सरकार अतीत में USCIRF की टिप्पणियों को खारिज करती रही है और आयोग की विश्वसनीयता तथा उसके आकलन पर सवाल उठाती रही है।

मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान आया यह बयान अब भारत-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ धार्मिक स्वतंत्रता और RSS की भूमिका को लेकर नई राजनीतिक बहस का कारण बन सकता है।

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