मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक ज्ञान का वह दीप हैं, जो विद्यार्थियों के जीवन में प्रकाश फैलाने के साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। उनके अनुसार, विद्यालय का उद्देश्य बच्चों को केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि उनमें ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करना भी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों को जीवन में सही निर्णय लेने और परिस्थितियों को समझने की क्षमता प्रदान करना भी है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय शिक्षा की प्राचीन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुकुल केवल पाठ्य ज्ञान देने के केंद्र नहीं थे। वहां विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों, अनुशासन और अपने दायित्वों की समझ भी दी जाती थी।
उन्होंने कहा कि ज्ञान की सार्थकता तभी है, जब वह व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने के साथ समाज के लिए भी उपयोगी साबित हो। इसी सोच के साथ परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, तकनीक, नवाचार और कौशल विकास से जोड़ने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक तेजी से लोगों के जीवन और काम करने के तरीकों को बदल रही है। ऐसे में डिजिटल साक्षरता के साथ **AI साक्षरता** भी समय की जरूरत बन गई है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप-टेक और अन्य उभरती तकनीकें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रही हैं। युवाओं को इन तकनीकों से परिचित कराकर उन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।
सीएम ने लखनऊ में विकसित हो रहे AI City और कानपुर में ड्रोन एवं UAV तकनीक के उभरते इकोसिस्टम को तकनीकी भविष्य की संभावनाओं से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश में नई तकनीक के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे विभिन्न प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने **ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों** को शिक्षा और युवाओं के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान केवल विद्यालयों में पढ़ाई तक सीमित नहीं है। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग देने और युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे का विद्यालय से बाहर रह जाना केवल उसकी व्यक्तिगत क्षति नहीं है, बल्कि इससे समाज और देश के विकास की संभावनाएं भी प्रभावित होती हैं। इसलिए हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना सामूहिक जिम्मेदारी है।
योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों की भूमिका को शिक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों में जिज्ञासा, संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करते हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, आधुनिक तकनीक शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षक की भूमिका का कोई विकल्प नहीं है।
मुख्यमंत्री ने 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस** के अवसर पर ज्ञान के विस्तार और प्रत्येक व्यक्ति को सशक्त बनाने का संकल्प लेने की अपील की।
उन्होंने कहा कि साक्षरता का लक्ष्य केवल पढ़ना और लिखना सीखने तक सीमित नहीं होना चाहिए। आज के समय में प्रत्येक नागरिक को डिजिटल दुनिया की बुनियादी समझ और तेजी से विकसित हो रही AI तकनीक की जानकारी भी होनी चाहिए।
सीएम ने कहा कि इस अभियान की सफलता समाज के सामूहिक सहयोग के बिना संभव नहीं है। सरकार, शिक्षक, अभिभावक और समाज मिलकर यह सुनिश्चित करें कि **हर बच्चा विद्यालय पहुंचे और हर विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करे।**
उन्होंने युवाओं को कौशल और नवाचार से जोड़ने तथा नागरिकों को साक्षरता के साथ डिजिटल और AI ज्ञान से परिचित कराने का आह्वान किया।
Digital Desk: Administrator
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।