अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रोजेक्ट्स की गूंज
(India) फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब गूगल और ह्यूलेट पैकर्ड (एचपी) ने भी अपनी टेक्नॉलजी की ताकत दिखाने के लिए सरकारी गलियारों में दस्तक दी है। इससे देश की इकॉनमी में रिकवरी के साथ विदेशी इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन चलाने वाली गूगल ने टेलिकॉम डिपार्टमेंट को हीलियम से भरे गुब्बारों के जरिए देशभर में सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराने का प्रपोजल दिया है। अभी प्रोजेक्ट ‘लून’ नाम के इस प्रोजेक्ट का ट्रायल न्यूजीलैंड, अमेरिका और ब्राजील में चल रहा है। यह गूगल का अपनी राइवल फेसबुक के सोलर पावर से चलने वाले ड्रोन्स का जवाब है। गूगल की योजनाओं की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने ईटी को बताया, सुंदर पिछाई टेलिकॉम मिनिस्टर रवि शंकर प्रसाद से मिलकर व्यक्तिगत तौर पर इस बारे में बात करना चाहते थे लेकिन पिछाई की हाल की भारत यात्रा के दौरान उनकी प्रसाद से मुलाकात नहीं हो सकी। उस समय रवि शंकर प्रसाद जर्मनी में थे। इसके बाद गूगल के एग्जेक्यूटिव्स ने टेलिकॉम सेक्रेटरी राकेश गर्ग सहित डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मीटिंग की। गूगल, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियां भारत के सुदूर इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट प्रोवाइड कराने के लिए एक-दूसरे से मुकाबला कर रही हैं। केंद्र सरकार 1.13 लाख करोड़ रुपये के डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट के तहत हेल्थ, एजुकेशन जैसे एरिया में देश के प्रत्येक कोने में ई-सर्विसेज देने के लिए नैशनल ऑप्टिक फाइबल नेटवर्क का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। इस नेटवर्क के लिए वायरलेस टेक्नॉलजी की जरूरत हो सकती है,

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