राम रहीम की चाची रणजीत कौर और उसका बेटा रजिन्द्र सिंह का कहना है कि शुक्रवार को तो आसपास के कुछ लोग राम रहीम के घर में बने आश्रम में एकत्रित हुए थे, लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद सभी अपने-अपने घरों में लौट गए। चाची ने मीड़ियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद भतीजे की गिरफ्तारी की बात सुनकर सिर शर्म से झुक गया, हम तो मानते वह बड़ा संत है, लेकिन उसने ऐसे कारनामें किए है, जो परिवार ही नहीं बल्कि पूरे गांव के लिए शर्म की बात है । परिजनों ने बताया कि उसके पिता मग्धर सिंह क्षेत्र के बड़े जमींदार थे, उनके पास 150 बीघा जमीन थी। राम रहीम जब 10 वर्ष का था तो उन दिनों सिरसा के संत सतनाम का प्रभाव श्रीगंगानगर जिले में भी बढ़ रहा था। जिले के काफी लोग संत सतनाम के प्रवचन सुनने सिरसा जाया करते थे, इन्ही के साथ राम रहीम की मां भी जाती रहती थी। राम रहीम भी अपनी मां के साथ सतनाम के सिरसा आश्रम में जाने लगा, गांव में 10 कक्षा तक की पढ़ाई करने के बाद उसका मन अधिकतर संत सतनाम की ओर ही रहता था। कई बार पढ़ाई छोड़कर वह सतनाम के आश्रम पहुंच जाता था, इसी बीच उसके पिता ने उसका विवाह कर दिया, लेकिन वह अधिक दिनो तक घर में नहीं रह सका और फिर आश्रम में आवाजाही अधिक कर दी ।
Author: JAN TV Editorial Team
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