हाईकोर्ट के आदेश पर पिछले वर्ष बंद हुई यह तांगा दौड़ फिर से प्रारम्भ कराने को लेकर राज्य सरकार पर काफी दबाव बना हुआ था। इस मुद्दे को लेकर राजनीति चरम पर पहुंच गई थी। भाजपा विरोधी दल तांगा दौड़ को आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से राजनीतिक मुद्दा बना रहे थे,निर्दलिय विधायक हनुमान बेनीवाल ने तो सैंकडों समर्थकों के साथ जिला कलेक्ट्रेट का घेराव कर तांगा दौड़ शुरू नहीं होने पर किसी अनहोनी की चेतावनी दी थी वहीं नागौर सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री सी.आर.चौधरी सहित भाजपा के सभी नेता तांगा दौड़ शुरू कराने को लेकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से कई बार आग्रह कर चुके थे। बढ़ते राजनीतिक दबाव के चलते सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर तांगा दौड़ पर प्रतिबंध हटाने का आग्रह किया था।
राज्य सरकार ने इस मामले में पैरवी के लिए विशेष रूप से तमिलनाडू में जलीकट्टृू रेस मामले में केन्द्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाले केन्द्र के एडिशनल सोलिसिटर जनरल पी.एस.नरसिम्हा और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल सिंह को कोर्ट में खड़ा किया। लेकिन न्यायाधीश निर्मलजीत कौर एवं गोविंद माथुर की खंडपीठ ने तांगा दौड़ फिर से शुरू करने को मंजूरी नहीं दी। कोर्ट में सरकार की ओर से पक्ष रखा गया कि नागौर जिले के जिन चार गांवों में तांगा दौड़ होती है,वहां की ग्राम पंचायतों ने शपथ पत्र पेश कर कच्चे रास्ता होने की बात कही है
लोकभावना को देखते हुए अनुमति दी जानी चाहिए। वहीं इसका विरोध करते हुए रोक लगाने वाले याचिककर्ता के वकील महावीर विश्नोई ने कहा कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में एसएलएपी दर्ज करा रखी है,इसमें सरकार ने स्वीकारा है कि तांगा दौड़ से घोड़ों के साथ क्रूरता होती है । सरकार खुुुद मान रही है तांगा दौड़ पशु क्रूरता की श्रेणी में आती है । सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार की याचिका खारिज कर दी ।
Author: JAN TV Editorial Team
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