डॉ. सुनील ने बताया कि नवजात की जांच करने पर पाया गया कि उसके दिल और फेफड़ों के बीच कोई संपर्क और रास्ता नहीं था। नवजात के हृदय में बड़ा छेद भी था। महाधमनी और फेफड़ों के बीच महज एक छोटा क्लोजिंग पाइप था जिससे वह केवल कुछ समय के लिए जीवित रह सकता था।
नवजात की कार्डियक सर्जरी करके हृदय और फेफड़ों तक रक्त प्रवाह बहाल करना जरूरी था। जन्म के 18 घंटे के बाद सर्जरी की रूपरेखा तैयार की गई। चार घंटे चले ऑपरेशन में नवजात की ओपन हार्ट की सर्जरी की गई। नवजात पूरी तरह स्वस्थ है लेकिन कुछ दिन निरीक्षण में रखा जाएगा। डॉ सुनील ने देश में सबसे कम उम्र के नवजात की पहली ओपन हार्ट सर्जरी करने का दावा किया है।
डॉ. सुनील ने बताया कि देश में बच्चों के 400 हार्ट सर्जरी सेंटर होने चाहिए। हर सेंटर पर एक साल में करीब 1000 से अधिक सर्जरी होनी चाहिए लेकिन 25 सेंटरों पर मात्र 500 बच्चों की ही हार्ट सर्जरी हो रही है। इससे हर साल करीब 78 हजार बच्चों की मौत हो रही है। देश में हर साल करीब 80 हजार ऐसे बच्चों का जन्म होता है जिन्हें कुछ दिन-समय के बाद सर्जिकल इलाज की आवश्यकता होती है परंतु 2000 बच्चों का ही इलाज होता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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