प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि UPSC का शताब्दी समारोह केवल 100 साल पूरे होने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह आयोग की विरासत का भी जश्न है। यह उन लाखों युवाओं की आकांक्षाओं का उत्सव भी है, जो हर साल अपने सपनों को साकार करने की कोशिश करते हैं।
सम्बोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि 100 साल की इस यात्रा में पीढ़ियां बदलीं, सरकारें बदलीं, सिलेबस और तकनीक बदले, लेकिन UPSC पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है। UPSC ने देश की बदलती जरूरतों के अनुसार समय-समय पर खुद को ढाला है।
उन्होंने कहा कि आयोग ने कई पीढ़ियों के योग्य लोक सेवकों की पहचान करने और उन्हें तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। इसका सीधा प्रभाव भारत की विकास यात्रा पर पड़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को याद करते हुए कहा कि आजादी के बाद उनके सामने केवल देश को स्वतंत्र बनाए रखने की चुनौती नहीं थी, बल्कि देश को चलाने की भी बड़ी जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए प्रशासनिक ढांचे की मजबूत नींव सरदार वल्लभभाई पटेल ने रखी थी। उन्होंने इस संस्था को स्वतंत्र भारत का एक प्रमुख स्तंभ बनाया और उसे मजबूत किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन युवाओं की आज भर्ती हो रही है, वे विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि यही युवा विकसित भारत के सबसे बड़े लाभार्थी भी होंगे।
उन्होंने चयन प्रक्रिया को लेकर दो कसौटियों को याद रखने की बात कही—पहली, ‘देश पहले’ और दूसरी, ‘नागरिक पहले’। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन्हीं दो कसौटियों को ध्यान में रखकर चयन होना चाहिए।
Author: JAN TV Editorial Team
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