क्या है इबोला वायरस
इबोल वायरस एक ऐसा वायरस है, जिससे इबोला वायरस बीमारी (ईवीडी) या इबोला रक्तस्त्राव बुखार (ईएचएफ) होता है। सबसे पहले ये वायरस 1976 में सुडान और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में पाया गया था। इसके लक्षण वायरस के संपर्क में आने के 2 दिन से 3 हफ्ते में फैलते हैं। इसके लक्षण हैं- बुखार आना, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, जी मिचलाना, उल्टी, डायरिया आदि हैं। इससे लीवर और किडनी काम करना कम कर देते हैं। इस स्थिति में कुछ लोगों में रक्तस्त्राव की समस्या शुरू हो जाती है। इबोला का ना तो कोई टीका है और ना ही विशेष इलाज है। इसकी मृत्यु दर कम से कम 60 प्रतिशत है।
फैलने के कारण
ये वायरस संक्रमित जानवर विशेष तौर में बंदर, चमगादड़ या उड़ने वाली लोमड़ी और सुअरों के खुन या शरीर के तरल पदार्थ से फैलता है। अब तक इस बीमारी का कोई विशेष उपचार नहीं है। फिर भी इससे ग्रस्त लोगों की मदद के लिए उन्हें ओरल रिहाईड्रेशन थैरेपी, जिसमें रोगी को मीठा और नमकीन पानी पीने के लिए दिया जाता है या नसों में तरल पदार्थ दे सकते हैं। इस रोग में मृत्यु दर काफी ऊंची है। लाइबेरिया की राष्ट्रपति ने विषाणु के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए देश के स्कूलों को बंद करने और अधिकतर सरकारी कर्मचारियों को घर में रहने के आदेश दिए हैं। इबोला की चपेट में आकर पश्चिम अफ्रीका में अब तक 670 से अधिक लोग मारे गए हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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