हाई ब्लड प्रेशर में नमक नहीं चीनी है खतरनाक
(India) विशेषज्ञों ने चीनी को बच्चों के दांतों का दुश्मन बताते हुए कहा है कि इसका अधिक उपयोग उनकी सीखने की क्षमता भी प्र्रभावित कर सकता है। इस संबंध में डा. जेम्स डिनिकोलानटोनियो के नेतृत्व में किए गए अनुसंधान की रिपोर्ट अमेरिकन जनरल ऑपक कार्डियोलॉजी के ताजा अंक में प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्तियों को नमक के मुकालबे चीनी के उपयोग से दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक की आशंका अधिक है। शरीर में चीनी का उच्च स्तर मस्तिष्क के प्रमुख हिस्से "हाइपोथालमस" को प्रभावित करता है, जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। डा. जेम्स ने यह भी कहा कि हाई ब्लड प्रेशर में नमक कम खाने की सलाह को हमारी शोध में नकार दिया गया है। शोध के दौरान ऎसे मामले सामने आए हैं जिससे पता चला है कि नमक कम खाने अथवा नहीं खाने से हम कई तरह की गंभीर बीमारियों की चपेट आ सकते हैं। नमक की कमी को पूरा करने के लिए हम प्रोसेस्ड फूड और अधिक चीनी वाली खाद्य वस्तुओं की तरफ आकर्षित होते हैं जिससे मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एक्शन ऑन शुगर अभियान समूह के निदेशक डा. असीम मल्होत्रा ने भी इस नए शोध की वकालत करते हुए कहा कि हालांकि वजह बहुत जटिल है लेकिन यह समझा जाता है कि शरीर में नमक के कम स्तर से हमारे खून में चुनिन्दा वसा की मात्रा बढ़ जाती है। चीनी के उपयोग से शरीर को होने वाले खतरों से आम लोग संभवत पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। डा.मल्होत्रा ने कहा कि हम यह अच्छी तरह जानते हैं कि चीनी हमारे लिए स्वास्थवर्धक नहीं है और ऎसे तमाम साक्ष्य सामने आए हैं जिनसे यह साफ हो गया है कि अकेले चीनी के सेवन से कई बीमारियों का खतरा पैदा हो जाता है। मोटापा पर नियंत्रण के लिए काम करने वाली लंदन की एजेंसी "पब्लिक हेल्थ इंग्लैड" के इस वर्ष जून में दिशानिर्देश के अनुसार महिलाओं को एक दिन में पांच से छह चम्मच और पुरूषों को सात से आठ चम्मच से अधिक चीनी का उपयोग नहीं करना चाहिए। लेकिन आम तौर पर देखा गया है कि मीठा दही, फ्रूट जूस, कोल्ड ड्रिंक्स, मुसली एवं अन्य तैयार खाद्य पदार्थो के सेवन की वजह से दिन भर में 15 चम्मस से अधिक चीनी का सेवन कर लेते हैं जिससे कई बीमारियों का खतरा पैदा हो जाता है। लंदन के कई स्वास्थ्य संगठनों ने फ्रूट जूस एवं कोल्ड ड्रिंक्स पर अधिक कर लगाए जाने की मांग की है जिससे कीमत को देखकर इसकी खपत खास करके बच्चों में कम हो और उन्हें कई तरह की खतरनाक बीमारियों से बचाया जा सके।

Author: JAN TV Editorial Team

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