इसी आधार पर अध्ययन में कहा गया है कि रेशेदार भोजन शरीर में दमा जैसे रोगों में असरकारक हो सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि पश्चिमी देशों में 60 के दशक में जब भोजन में रेशेदार पदार्थो के सेवन में कमी आई तो उसी दौरान दमा का तेजी से प्रसार हुआ। लेकिन कम विकसित देशों में भी अब दमा एक आम बीमारी हो चुकी है।
रेशेदार भोजन और अस्थमा के बीच संबंध का परीक्षण करने के लिए स्विट्जरलैंड के लुसाने विश्वविद्यालय में प्रतिरक्षा विज्ञानी बेंजामिन मार्सलैंड व उनके साथी शोधकर्ताओं ने चूहों के एक समूह को लगातार कम रेशेदार भोजन दिया। दो सप्ताह बाद शोधकर्ताओं ने चूहों में धूल कणों में पाई जाने वाली एक एलर्जी पैदा करने वाली चीज पाई, जो मनुष्यों में दमा फैलाने में अहम भूमिका अदा करती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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