एशिया में खराब स्वास्थ्य प्रणाली के कारण इबोला का खतरा
(India) इस बीमारी पर नियंत्रण इस बात पर निर्भर करेगा कि इसका पता लगाने के लिए कितनी तेजी से कदम उठाए जाते हैं और उपचार में क्या तरीके अपनाए जाते हैं । उसी से तय होगा कि इस क्षेत्र में यह विषाणु कितना असर फैलाएगा जहां अरबों लोग गरीबी में रहते हैं और जहां स्वास्थ्य सेवाएं भी अक्सर खराब रहती हैं। सरकारें प्रतिक्रिया की योजनाएं बना रही है, हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है और अलग-थलग करने के उपायों पर विचार किया जा रहा है। फिर भी, क्षेत्र के विकासशील देशों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों को डर है कि वायरस का फैलाव घातक होगा और उस पर काबू पाना मुश्किल होगा। दिल्ली से सटे गुड़गांव में स्थित मेदांता मेडिसिटी अस्पताल के चिकित्सक, यतिन मेहता कहते हैं, ‘यह एक लाइलाज बीमारी है, जिसकी मृत्यु दर बहुत ज्यादा है। यहां तक की अमेरिका जैसा देश भी पूरी तरह से इस पर रोक लगाने में सक्षम नहीं हो पाया है।’ उन्होंने कहा ‘सरकार कोशिश कर रही है। वे तैयारियां कर रहे हैं और वे प्रशिक्षण कर रहे हैं, लेकिन इतिहास में हमारा आपदा प्रबंधन का रिकॉर्ड बहुत बदतर रहा है।’ विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, इबोला से 10,000 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और इनमें से करीब आधों की मौत हो गई है। इबोला के शुरआती लक्षणों में बुखार आना, सिर दर्द, शरीर में दर्द, खांसी, पेट में दर्द, उल्टी आना और अतिसार होना शामिल है। एशिया में दुनिया की 60 फीसदी आबादी रहती है। एशिया विकास के ज्यादातर मानकों में पश्चिम अफ्रीका से कहीं आगे है। एशिया में ही सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे विकसित या उभरते हुए देश हैं। लेकिन भारत, चीन, फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों में बड़ी संख्या में गरीब लोग रहते हैं, जिनमें से ज्यादातर झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं। यहां स्वास्थ्य सेवाओं पर पर्याप्त मात्रा में धन भी खर्च नहीं किया जाता। भारत की पूर्व स्वास्थ्य सचिव सुजाता राव ने कहा कि जब स्वास्थ्य संकट उत्पन्न होता है तो भारत की स्वास्थ्य प्रणाली अत्याधिक सक्रिय हो जाती है, जैसे 2009 में एच1एन1 महामारी के दौरान देखने को मिला था। उन्होंने कहा कि भारत में हम संकट प्रबंधन में बहुत अच्छे हैं, लेकिन रोजाना की देखभाल में निराशाजनक स्थिति है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत इबोला से निपटने के लिए तैयार है तो उन्होंने कहा, ‘हम तैयार नहीं हैं, लेकिन उतनी तैयारी तो है जो कोई भी देश कर सकता है।’

Author: JAN TV Editorial Team

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।