ग्रंथों में सुबह जल्दी नहाने को क्यों कहा गया है, इस उपाय से बढ़ सकती है इनकम
(India) मन के कलह को भी कम करने वाला बताया गया है। रोगियों व लाचारों के लिए स्नान के समय उपयोग की जाने वाली कई महत्वपूर्ण जड़ीबूटियों का वर्णन भी ग्रंथों में मिलता है। पौराणिक मान्यता है कि श्रीहरि विष्णु के आदेश से सूर्योदय से अगले 6 दंड यानी लगभग ढाई घंटे की शुभ घड़ी तक जल में सारे देवता व तीर्थ वास करते हैं, इसलिए सुबह तीर्थ स्नान से सभी पापों का नाश व उनसे रक्षा भी होती है। खासकर रविवार या मकर संक्रांति जैसे सूर्य भक्ति के शुभ दिन तो सुबह नहाए बिना धार्मिक कार्य दोषपूर्ण ही माने गए हैं। सुबह स्नान की अहमियत पर शास्त्रों की बातों पर गौर करें, तो स्नान से जुड़े ऐसे 10 अहम फायदे भी बताए गए हैं, जिनका संबंध जीवन के कई विषयों व कामनाओं से है।
हिन्दू धर्मशास्त्र कहते हैं कि-
सरल शब्दों में मतलब है कि सुबह स्नान करने से 10 गुण प्राप्त होते हैं। इनमें पहला है- रूप यानी सौंदर्य या खूबसूरती। इसके अलावा बाकी 9 फायदे इस तरह हैं-
- शारीरिक बल या शक्ति।
- तेज यानी चैतन्यता, ज्ञान, ऊर्जा।
- मानसिक बल।
- पवित्रता यानी मन, विचार व कर्म में पावन होते हैं।
- स्वास्थ्य।
- बुद्धि और विवेक- सही और गलत में फर्क की समझ व निर्णय क्षमता।
- बुरे सपनों से छुटकारा।
- निर्लोभता या लालसा से मुक्ति।
- यश।
सार यही है कि शुभ घडिय़ों या हर रोज भी स्नान से तन निरोगी होने के साथ-साथ मन-मस्तिष्क भी ऊर्जावान और तनावमुक्त रहता है। इससे न केवल इंसान की उम्र बढ़ती है, बल्कि इससे बढ़ा मनोबल व पैदा हुए अच्छे विचार सफल और यशस्वी बनाने वाले साबित होते हैं।
धर्मशास्त्रों के नजरिए से धनवान बनने का मतलब केवल ज्यादा से ज्यादा धन बटोरना नहीं है, बल्कि धन के साथ गुणी होना ही असल में अमीरी मानी गई है। इसके बिना पाया धन भी यश व सुख नहीं देता। गुणवान बन धन पाने की राह आसान बनाने के लिए शास्त्रों में तन व मन की पवित्रता का महत्व बताया गया है। ऐसे ही गुण और धन संपन्न बनने के लिए शास्त्रों में नहाते वक्त पावन व देवनदी गंगा का विशेष मंत्र से स्मरण का महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इससे त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु व शिव का भी स्मरण हो जाता है, क्योंकि किसी न किसी रूप में गंगा तीनों ही देवताओं को प्रिय है। जानिए, यह मंत्र -

ब्रह्मकुण्डली, विष्णुपादोदकी, जटाशंकरी, भागीरथी, जाह्नवी।

या फिर यह स्नान मंत्र बोलें -

गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति ।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलस्मिन्सन्निधिं कुरु ।।
धार्मिक आस्था है कि इस मंत्र के साथ स्नान करने वाला कर्म, वचन और व्यवहार में गंगा की पावनता के साथ त्रिदेवों की भी गुण व शक्ति रूपी दौलत से संपन्न हो जाता है।
शास्त्रों के मुताबिक सुबह स्नान करना ऐसा आसान उपाय है, जो तन के साथ मन को पवित्र कर देता है, क्योंकि सेहतमंद शरीर ही मन को भी सबल रखता है। इससे कोई इंसान मानसिक व वैचारिक रूप से मजबूत व पावन बन आसानी से मनचाही सफलता व मुकाम हासिल कर वैभवशाली जीवन भी जी सकता है।

Digital Desk: Shiv Kishor

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