14 नहीं 15 को है मकर संक्रांति, 83 साल बाद बनेगा समसप्तक योग
(India) लेकिन शाम 5.58 बजे ही सूर्य अस्त हो जाएगा। संक्रांति चूंकि सूर्य का पर्व है, इसलिए सूर्य के साक्षी नहीं होने से यह 15 जनवरी को मनेगी। स्नान, दान-पुण्य के लिए भी 15 जनवरी को उदय काल में संक्रांति सर्वश्रेष्ठ रहेगी।
उज्जैन के पंचांगकर्ता एवं ज्योतिषाचार्य पं. श्यामनारायण व्यास के अनुसार 15 जनवरी को संक्रांति के साथ उच्च के बृहस्पति से सूर्य सहित तीन प्रमुख ग्रहों का समसप्तक योग बन रहा है। यह शुभ संयोग 83 वर्ष बाद आया है। आगे यह 35 वर्ष के बाद आएगा। शास्त्रों में संक्रांति लगने के 16 घंटे पूर्व पुण्यकाल माना गया है, जो 14 जनवरी की दोपहर 12.34 बजे से शुरू हो जाएगा। पंचांगकर्ता एवं ज्योतिषी पं. आनंदशंकर व्यास ने कहा 15 जनवरी को उदयकाल में संक्रांति का स्नान, दान-पुण्य सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
ज्योतिषी पं. विनय भट्ट के अनुसार ग्रहों का एक-दूसरे से सातवीं राशि में होना समसप्तक योग कहलाता है। मकर संक्रांति पर मकर राशि में सूर्य के साथ बुध व शुक्र है। इन तीनों ग्रहों से सातवीं राशि में गुरु है। इस प्रकार समसप्तक योग बन रहा है। पं. भट्ट के अनुसार मकर राशि में सूर्य, शुक्र और बुध का संयोग देश-दुनिया के लिए लाभकारी रहेगा। इस योग में बाजार से खरीदी करना भी शुभ है। इस योग के प्रभाव से तिलहन व अनाज के दाम में वृद्धि संभव है।
14 नहीं 15 को है मकर संक्रांति, 83 साल बाद बनेगा समसप्तक योग
इसलिए संक्रांति कभी 14, कभी 15 जनवरी को
पृथ्वी की गति प्रतिवर्ष पीछे और सूर्य का संक्रमण आगे बढ़ता है। इसके कारण संक्रांति कभी एक दिन आगे तो कभी पीछे आती है। हालांकि लीप ईयर में पृथ्वी और सूर्य दोनों वापस उसी स्थिति में जाते हैं। पं. व्यास के मुताबिक वर्ष 2015 के बाद 2016, 2019, 2020 में भी संक्रांति 15 जनवरी को है, जबकि बीच में 2017, 2018 2021 में संक्रांति 14 को आएगी

Digital Desk: Shiv Kishor

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