ग्लोबल वार्मिंग इफेक्ट बढ़ रहे हैं मच्छर जानलेवा बीमारियों का खतरा
(India) जलवायु परिवर्तन के चलते लगातार तापमान बढ़ रहा है। इस साल का मार्च महीना 137 सालों में दूसरा सबसे गर्म मार्च रहा। इसका असर हमारे जीवन पर पड़ना तय है। हालांकि इसका असर मच्छरों और चींटीयों पर नहीं पड़ेगा जिससे इंसान को सबसे ज्यादा खतरा है। कई शोध ये बात साबित कर चुके हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते मच्छरों के जीने का दायरा बढ़ रहा है। वे ऐसी जगहों पर पहुंच रहे हैं जहां पहले नहीं हुआ करते थे। अब तो 'स्वच्छ' यूरोप भी उनसे नहीं बचा है।

सब जानते हैं कि मच्छर एक भयानक रोग वाहक है। यह अनेक घातक रोगों के प्रसार के लिए जिम्मेदार होता है। मच्छरों से होने वाले डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, कालाजार, मस्तिष्क शोथ, फाइलेरिया, रिफ्ट वैली बुखार, रॉस रिवर बुखार, पश्चिमी नील विषाणु, जापानी बुखार आदि प्रमुख हैं। दुनिया में मच्छरों की 3,500 से अधिक प्रजातियां हैं। मच्छर माइनस 10 डिग्री सेल्सियस जैसी प्रचंड ठंड में भी जीवित रह सकने की क्षमता रखते हैं। एनोफिलीज गैम्बी प्रजाति सूडान में 55 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्मी में भी जीवित रहती है।

कुछ साल पहले यूएस जर्नल साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन में इथियोपिया और कोलंबिया के आंकड़ों के आधार पर बताया गया है कि दुनिया भर में मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियों में भारी बढ़ोतरी की आशंका है। इन बीमारियों के चलते 2012 के दौरान दुनिया भर में करीब सवा छह लाख लोग मारे गए थे। शोधकर्ताओं के अनुसार तापमान बढ़ने के कारण मलेरिया के मरीज़ों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

Author: JAN TV Editorial Team

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