रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के एक वैज्ञानिक ने कहा कि इस अत्याधुनिक मिसाइल को परीक्षण के लिए उत्पादन भंडार से चुना गया और यह परीक्षण गतिविधियां विशेष रूप से गठित सामरिक बल कमान ने की और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने इस पर नजर रखी। मिसाइल के प्रक्षेपण पथ पर ओडिशा के तट के निकट स्थित टेलीमेट्री स्टेशनों, डीआरडीओ रडारों और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम्स ने नजर रखी। बंगाल की खाड़ी में निर्धारित प्रभाव बिंदु के निकट तैनात पोत पर सवार टीम ने टर्मिनल गतिविधियों एवं मिसाइल के समुद्र में उतरने की निगरानी की। इससे पहले 21 नवंबर 2016 को इसी जगह से दो पृथ्वी 2 मिसाइलों का एक के बाद एक परीक्षण किया गया था। इस नौ मीटर लंबी मिसाइल को वर्ष 2003 में भारतीय सशस्त्र बल में शामिल किया गया था। यह पहली ऐसी मिसाइल है जिसे डीआरडीओ ने एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत विकसित किया है।
Digital Desk: Firoz Khan
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