बद्रीलाल की सर्जरी फरीदाबाद के एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में की गई। कार्डियोवैस्क्युलर सर्जन डॉक्टर आदिल रिज़वी ने बताया कि गले का हिस्सा बहुत जटिल होता है। इसकी कई नसें पूरी बॉडी का कनेक्शन ब्रेन से कराती हैं। इन नसों में किसी भी रुकावट से मौत का खतरा हो सकता है। सबसे बड़ी परेशानी मरीज को सर्जरी के लिए बेहोश करने की थी। विंड पाइप में कई पिन एक-दूसरे को क्रॉस कर रही थीं। ऐनिस्थीसिया नली को विंड पाइप में नहीं डाला जा सकता था। इसके लिए 2 तरह से ऐनिस्थीसिया दिया गया। पहले लोकल ऐनिस्थीसिया देकर विंड पाइप से कुछ पिन निकाली गईं। उसके बाद फिर ऐनिस्थीसिया देकर मरीज के गले की ओपन सर्जरी कर बाकी पिन निकाली गईं।
ईएनटी एक्सपर्ट डॉक्टर एलएम पराशर ने बताया कि सीटी स्कैन और एंडॉस्कपी से पता चला कि बॉडी के अंदर 150 से ज्यादा पिन थीं। अधिकतर पिन गले में थीं। विंड पाइप ब्लॉक हो रही थी। कुछ दिनों से उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। वह खाना तक नहीं खा पा रहे थे। वजन भी 30 किलो कम हो गया था। 24 जून को उन्हें इलाज के लिए ऐडमिट किया गया था। 29 जून को पहली और 2 जुलाई को दूसरी सर्जरी की गई। डॉक्टर ने कहा कि बाकी पिनें जान के लिए खतरा नहीं हैं। इसलिए उन्हें अभी छोड़ दिया है।
राजस्थान में बूंदी के रहने वाले बद्रीलाल को 4 महीने पहले पैरों में घाव हो गया। जख्म बढ़ता गया। एक्स-रे में उनके पैरों में लोहे की पिन दिखीं। डॉक्टरों ने जब पूरे शरीर का एक्स-रे किया तो लगभग हर पार्ट में पिन पाई गईं। रेलवे में काम करने वाले ब्रदीलाल को बॉडी के अंदर मिलीं पिन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनके डॉक्टर का कहना है कि वह मानसिक रोगी हैं और खुद ही अपने शरीर में ऐसे पिन डालते थे।
Author: JAN TV Editorial Team
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