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गुजरात के सभी सरकारी अस्पतालों में नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए आधुनिक सुविधाएं तेजी से मुहैया कराई जा रही हैं। राज्य सरकार ने 58 स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट यानी एसएनसीयू बनाए हैं। पिछले साल इनमें 70 हजार से ज्यादा नवजात शिशुओं का मुफ्त इलाज किया गया। जिन नवजात शिशुओं का वजन कम होता है या जिन्हें सांस या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, उन्हें इन यूनिट में नया जीवन मिलता है। इससे नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में काफी कमी आई है। "हमारा बच्चा अब ठीक है। उसका वजन भी बढ़ रहा है। यहां सुविधाएं बेहतरीन हैं।" राजकोट में मां और बच्चे के लिए गुजरात का सबसे ऊंचा - 11 मंजिला अस्पताल है। इसमें 750 बेड हैं। सौराष्ट्र और कच्छ से भी मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं डॉ. मोनालिका मकडिया, चिकित्सा अधीक्षक, पीडीओ अस्पताल, राजकोट: "हमारे पास 700 बिस्तरों वाला मातृ एवं शिशु अस्पताल है, जो गुजरात सरकार का सबसे बड़ा 11 मंजिला अस्पताल है। इसमें 11 मंजिलें हैं जो केवल माँ और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए समर्पित हैं।" इन अस्पतालों में इलाज पूरी तरह से मुफ्त है। इससे गरीब तबके को बड़ी राहत मिलती है। आरिफ चौहान कहते हैं कि उनके बच्चे का शुगर लेवल बहुत कम था। सरकारी अस्पताल में उसका प्रभावी और मुफ्त इलाज किया गया। इसी इलाज के लिए निजी अस्पतालों में रोजाना 10 से 15 हजार रुपये खर्च करने पड़ते। आरिफ चौहान, लाभार्थी, राजकोट: निजी अस्पताल में 10,000 से 15,000 रुपये खर्च होते, लेकिन मुझे सारी सुविधाएं मुफ्त में मिलीं। हर साल 12 लाख से अधिक बच्चे पैदा होते हैं। उनमें से हजारों को एसएनसीयू में इलाज की जरूरत होती है यहां गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं की जान बचाई जा रही है। इससे राज्य में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में भारी कमी आई है।
Author: JAN TV Editorial Team
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