यह आदत अगर लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर में अनावश्यक फैट जमा होने लगता है, जो धीरे-धीरे लीवर में जमा होकर फैटी लिवर डिजीज का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इमोशनल ईटिंग का संबंध सीधे नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) से है, जो समय रहते नियंत्रण में न आए तो लिवर सिरोसिस या फेल्योर का खतरा बढ़ सकता है।
इससे बचने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति अपनी भावनाओं को समझे और खाने की आदतों पर नजर रखे। हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज और स्ट्रेस मैनेजमेंट से इस आदत पर काबू पाया
Author: JAN TV Editorial Team
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