ब्रोकरेज रिपोर्टों के मुताबिक इस फैसले से टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स और ऑटो एंसिलरीज जैसे निर्यात-आधारित क्षेत्रों को खास लाभ मिलने की उम्मीद है। कम टैरिफ से भारतीय कंपनियों की कीमत-प्रतिस्पर्धा सुधरेगी, जिससे अमेरिकी खरीदारों के लिए भारत से सोर्सिंग ज्यादा आकर्षक हो सकती है। इससे ऑर्डर बढ़ने, फैक्ट्रियों की क्षमता उपयोग में सुधार और रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि जानकार यह भी कहते हैं कि कुछ सेक्टर्स—जैसे ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमीनियम—अब भी पुराने शुल्क ढांचे के तहत रहेंगे, जिससे उन्हें तत्काल राहत नहीं मिलेगी। इसके बावजूद बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि यह डील भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दे सकती है और मध्यम अवधि में निर्यात-आधारित विकास को मजबूती देगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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