नई पद्धति के तहत रियल जीडीपी निकालने के लिए 500-600 वस्तुओं के दामों का उपयोग किया जाएगा, जबकि पहले केवल लगभग 180 आइटम्स पर निर्भरता थी। साथ ही ‘डबल डिफ्लेशन’ तकनीक अपनाई जाएगी, जिसमें इनपुट (लागत) और आउटपुट (तैयार माल) दोनों की कीमतों में बदलाव को अलग-अलग समायोजित किया जाएगा। इससे खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के आंकड़े ज्यादा सटीक होने की उम्मीद है। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी International Monetary Fund ने भी भारत की पुरानी जीडीपी गणना प्रणाली पर सवाल उठाए थे।
सरकार 27 फरवरी को नई सीरीज जारी करेगी, जिसमें पिछले चार वर्षों का बैक-सीरीज डेटा भी शामिल होगा। मौजूदा अनुमानों के मुताबिक भारत की विकास दर 2025-26 में 7.4% रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 6.5% थी। नए बेस ईयर और सुधारित गणना पद्धति के बाद वास्तविक वृद्धि दर की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
Author: JAN TV Editorial Team
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