‘बिस्वकर्मा सेवक’ (कारीगर) ने लकड़ी के लट्ठों पर स्वर्ण कुल्हाड़ी से प्रहार कर इस प्रक्रिया की शुरुआत की। इसके साथ ही रथ निर्माण स्थल पर यज्ञ का आयोजन किया गया और पवित्र ‘अग्न्या माला’ लकड़ियों पर रखकर भगवान से अनुमति ली गई।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और हर वर्ष इसी विधि से रथों का निर्माण शुरू होता है। इस साल भी करीब 200 से अधिक कारीगर मिलकर तीन विशाल रथों—नंदीघोष, तालध्वज और देबदलन—का निर्माण करेंगे। ये रथ क्रमशः भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए तैयार किए जाते हैं।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने सभी सेवकों के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कामना की है कि इस वर्ष की रथ यात्रा सभी परंपराओं के अनुरूप सुचारू रूप से संपन्न हो।
गौरतलब है कि इस साल Rath Yatra 16 जुलाई को आयोजित की जाएगी, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
Author: JAN TV Editorial Team
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