इसका असर खास तौर पर बीकानेर के प्रसिद्ध रसगुल्ले और अन्य मिठाइयों के उत्पादन पर पड़ रहा है।
Urmul Dairy के प्रबंध निदेशक Babulal Bishnoi ने बताया कि गर्मियों में पशु स्वाभाविक रूप से कम दूध देते हैं, जिससे रसगुल्ला, गुलाब जामुन, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है।
दूसरी ओर, शादी के सीजन के चलते मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बाजार में दूध की उपलब्धता कम होने से मिठाई कारोबारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय मिठाई दुकानदारों का कहना है कि गर्मियों में दूध की कमी के कारण मांग के अनुसार मिठाइयों का उत्पादन कर पाना मुश्किल हो जाता है।
जानकारों के अनुसार, हर साल गर्मियों में बीकानेर में रसगुल्ले का उत्पादन करीब 25 प्रतिशत तक घट जाता है। वहीं दही, लस्सी, छाछ और आइसक्रीम जैसे ठंडे डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ जाती है।
हालांकि यह समस्या नई नहीं है। बीकानेर के लोग और डेयरी व्यवसायी वर्षों से इस मौसमी चुनौती का सामना करते आ रहे हैं और दूध की कमी को पूरा करने के लिए बाहर से सप्लाई मंगाने या पहले से स्टॉक रखने जैसे उपाय करते हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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