फेस्टिवल के दौरान गांव को एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में सजाया गया, जहां लोक संगीत, पारंपरिक कला, स्थानीय खानपान और पहाड़ी रीति-रिवाजों की शानदार झलक देखने को मिली। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का मकसद खाली पड़े पुराने घरों को होमस्टे में बदलना और जैविक खेती को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करना है।
आयोजक वरुण चंदोला के अनुसार, गांवों से लगातार हो रहे पलायन ने पहाड़ी जीवन को प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि कई लोग रोजगार और शिक्षा के लिए शहरों में बस गए हैं, लेकिन उनका अपने गांव से जुड़ाव आज भी कायम है। इसी सोच के साथ ‘म्यूजिकल विलेज’ की शुरुआत की गई, ताकि लोग अपनी जड़ों से फिर जुड़ सकें।
फेस्टिवल में पहुंचे लोगों ने इस पहल की जमकर सराहना की। उनका कहना है कि अगर स्थानीय लोग मिलकर ऐसे प्रयास करें तो गांवों का विकास संभव है और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान मिल सकती है।
पलायन की समस्या से जूझ रहे उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के बीच पोखरी गांव का यह प्रयास एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है। यह पहल दिखाती है कि संस्कृति, समुदाय और रचनात्मक सोच के जरिए गांवों को फिर से जीवंत बनाया जा सकता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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